जनसूचना अधिकारी एवं बीएमओ बी.बी. कोसरिया पर आरटीआई में भ्रामक जानकारी देने के आरोप
जेडीएस फंड और अटेंडेंस व्यवस्था भी जांच के घेरे में

खबरीलाल 24/अभनपुर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एक बार फिर शिकायतों को लेकर सुर्खियों में है। इस बार शिकायतों के केंद्र में जनसूचना अधिकारी एवं खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. बी.बी. कोसरिया हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी अधूरी, भ्रामक एवं बिना पर्याप्त सत्यापन के उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वास्तविक तथ्यों को सामने आने से रोका जा रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना के अधिकार अधिनियम का उद्देश्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन यदि वास्तविक जानकारी छिपाई जाती है या अधूरी सूचना दी जाती है, तो इससे संभावित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं पर पर्दा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। उनका आरोप है कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली साबित हो सकती है।
इसी बीच शिकायतों एवं स्थानीय सूत्रों के आधार पर यह आरोप भी सामने आए हैं कि अस्पताल के जेडीएस (जीवन दीप समिति)फंड के उपयोग में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। आरोप है कि एसी रिपेयरिंग, बिजली मरम्मत, नल मरम्मत तथा अन्य मदों में अनावश्यक अथवा संदिग्ध खर्च दर्शाकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ऑनलाइन आधार आधारित उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज नहीं होती, जबकि उपस्थिति रजिस्टर में पूर्ण उपस्थिति दर्शाई जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद संबंधित कर्मचारियों को पूरा वेतन भुगतान किया जा रहा है, जिससे विभागीय नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में असफल दिखाई दे रहा है, जिसके कारण कई कर्मचारी मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं और इसका असर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। इन सभी आरोपों के संबंध में जनसूचना अधिकारी एवं बीएमओ डॉ. बी.बी. कोसरिया का पक्ष जानने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजा गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, आरटीआई के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी का सत्यापन, जेडीएस फंड के व्यय का ऑडिट तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।





